Monday, June 05, 2006

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------------------------------गुरुमुख आजाद 'दीपक भैया'
------------------------------दि.6-6-2006


------------ॐ---------------
ये मन हैं कि मानता नहीं।
ओ-सी-डी ‘आब्सेशन कॅम्पलि‍सिव डिसआर्डर ’ एक मानसिक रोग है।
ओ-सी-डी से ग्रस्त व्यक्ति के मस्तिष्क में अनचाहें विचारो की एक चेंन सी चलती है।
जिनसे छुटकारा पाने हेतु वह कोई निरर्थक क्रिया करता है, उदाहरण के लिये-
1बार-बार बिना कारण के हाथ धोना
2अपराध बोध होना
3मौसम बदलने पर घबरा जाना
4क़ुण्डो,गैस,स्टोव आदि का बार-बार निरीक्षण करते रहना
5सीढ़िया चढ़ना-उतरना
6सड़को पर चक्कर काटतें रहना

शारिरक रोग स्पष्ट दिखाई पड़ते है और शारिरक रोगियो से सहयोग,सहानुभूति सभी सहज ही करते है! मनोरोगियो की भारी पीड़ा यह है कि उनका रोग स्पष्ट दिखाई नही पड़ते! सारे समाज का कर्तव्य है ऐसे निराश,दु:खी मनोरोगियो को सहानुभूति,प्रेम से धीरज देना

ओ-सी-डी के कारण-
विज्ञान ओ-सी-डी का कारण मस्तिष्क के कुछ रसायनो के असन्तुलन को मानता है!


अंग्रेजी डाक्टर इन लक्षणो से युक्त मनुष्य को ओ-सी-डी का मरीज कहते है और इसका उपचार अंग्रेजी दवाओ से करने का प्रयत्न करते है! मेरा तो निजी अनुभव ये है कि ये दवाए कई प्रकार के कुप्रभाव करके उल्टा और अधिक हानि पहुचाती है जैसे- पेट खराब करना,
मुहॅ सुखना,आलस्य छाए रहना आदि

आयुर्वेद वैध जडीबूटी द्वारा उपचार करते है! ब्राहमी,शंखपुष्पी,अश्वगंधा इत्यादि मनोरोगो में कल्याणकारी औष‍धियां है।

अध्यात्मिक विचार धारा का मानना है कि मानसिक रोग हमारे द्वारा हुए पिछले पाप के कारण उत्पन होते है! सन्त लोग इसके उपचार हेतु भगवान का ध्यान बताते है।अब मान लो इससे मनोरोग ठीक न भी हो, तो कोई हा‍नि तो नही होती ना। वास्तव मे जैसें शरीर को काम के पश्चात आराम देना जरूरी है, वैसे ही मन को भी विश्राम देना आवश्यक है। ध्यान से मन विश्राम पाता है। भगवान का ध्यान सदैव कल्याणकारी होता है।।
तो आज से नित्यप्रति ध्यान का नियम बनाईये।
भगवान सबका मंगल करें।।इति ॐ शान्ति।।